आज के समय में लोग अपने भोजन में अधिक पौष्टिक, प्राकृतिक और टिकाऊ विकल्प शामिल करना चाहते हैं। इसी कारण मिलेट्स, जिन्हें हिंदी में मोटे अनाज या श्रीअन्न कहा जाता है, फिर से लोकप्रिय हो रहे हैं। बाजरा, रागी, ज्वार, कंगनी, कुटकी, कोदो और सांवा जैसे अनाज ऊर्जा, फाइबर, खनिजों और प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं।
मिलेट्स में प्रोटीन की मात्रा किस्म, खेती की परिस्थितियों, मिट्टी, मौसम और प्रसंस्करण विधि के अनुसार बदलती है। उपलब्ध पोषण-आंकड़ों के अनुसार, 100 ग्राम कच्चे अनाज में फॉक्सटेल मिलेट में लगभग 12.3 ग्राम, प्रोसो मिलेट में लगभग 12.5 ग्राम और बाजरे में लगभग 11.6 ग्राम प्रोटीन पाया जा सकता है।academic.oup+1
मिलेट्स में प्रोटीन क्यों महत्वपूर्ण है?
प्रोटीन शरीर के निर्माण और मरम्मत के लिए आवश्यक पोषक तत्व है। यह मांसपेशियों, त्वचा, एंजाइम, हार्मोन और प्रतिरक्षा-तंत्र के कार्य में योगदान देता है। मिलेट्स से मिलने वाला प्रोटीन विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है जो अपने आहार में पौधों से मिलने वाले खाद्य पदार्थों की मात्रा बढ़ाना चाहते हैं।
हालाँकि, अधिकांश अनाजों की तरह मिलेट्स का प्रोटीन पूर्ण प्रोटीन नहीं माना जाता, क्योंकि इनमें कुछ आवश्यक अमीनो अम्ल अपेक्षाकृत कम मात्रा में हो सकते हैं। इसलिए मिलेट्स को दाल, चना, राजमा, सोयाबीन, दूध, दही, पनीर, अंडे या मेवों के साथ खाने से भोजन की प्रोटीन गुणवत्ता बेहतर हो सकती है।
